दस पैसे में संतरे की गोली
बीस पैसे में चॉकलेट
पचास पैसे में कुल्फी
एक रूपये में समोसे
एक रूपये में तीन फुल्की (पानी पतासे )
ये रेट हमारे स्कूल के टाइम के हैं
और आज
एक रूपये से कम में कुछ नहीं मिलता और और आजकल के छात्र दस , बीस पैसे तो जानते भी नहीं हैं
सिर्फ किताबों में ही पढ़ते हैं।
पहले पचास रुपए की पॉकेट मनी महीने भर चलती थी और आज हजार रूपये भी कम पड़ जाते हैं
बीस पैसे में चॉकलेट
पचास पैसे में कुल्फी
एक रूपये में समोसे
एक रूपये में तीन फुल्की (पानी पतासे )
ये रेट हमारे स्कूल के टाइम के हैं
और आज
एक रूपये से कम में कुछ नहीं मिलता और और आजकल के छात्र दस , बीस पैसे तो जानते भी नहीं हैं
सिर्फ किताबों में ही पढ़ते हैं।
पहले पचास रुपए की पॉकेट मनी महीने भर चलती थी और आज हजार रूपये भी कम पड़ जाते हैं
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