सोमवार, 2 मई 2016

दस पैसे में  संतरे की गोली
बीस पैसे में चॉकलेट
पचास पैसे में कुल्फी
एक रूपये में समोसे
एक रूपये में तीन फुल्की (पानी पतासे )

ये रेट हमारे स्कूल के टाइम के हैं

और आज

एक रूपये से कम में कुछ नहीं मिलता और   और आजकल के  छात्र  दस  , बीस पैसे तो जानते भी नहीं हैं
सिर्फ किताबों में ही  पढ़ते हैं।

पहले  पचास रुपए की पॉकेट मनी  महीने भर चलती थी और आज  हजार रूपये भी कम पड़ जाते हैं 

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