काश हमारे बचपन में स्मार्टफोन होते
तो हम वो हसीन पल कैप्चर कर पाते
बचपन में अक्सर गॉव के सारे बच्चे कभी इमली के पेड़ के नीचे , कभी आम के पेड़ के नीचे
गर्मियों की छुट्टियों में खेला करते थे , और मैं सभी बच्चों का लीडर हुआ करता था।
असल जिंदगी तो बचपन की ही होती है न कोई फ़िक्र न कोई चिंता बस अपनी धुन में मस्त मगन
और अगर बचपन पेड़ों की छाँव बाग बगीचों और नदियों के किनारे गुजरा हो तो साहब यादें तो
सुनहरी होंगी , लेकिन अफ़सोस अब शहरों से नाता मेरा है , जहाँ अब वो हसीन पल नसीब नहीं हैं
तो हम वो हसीन पल कैप्चर कर पाते
बचपन में अक्सर गॉव के सारे बच्चे कभी इमली के पेड़ के नीचे , कभी आम के पेड़ के नीचे
गर्मियों की छुट्टियों में खेला करते थे , और मैं सभी बच्चों का लीडर हुआ करता था।
असल जिंदगी तो बचपन की ही होती है न कोई फ़िक्र न कोई चिंता बस अपनी धुन में मस्त मगन
और अगर बचपन पेड़ों की छाँव बाग बगीचों और नदियों के किनारे गुजरा हो तो साहब यादें तो
सुनहरी होंगी , लेकिन अफ़सोस अब शहरों से नाता मेरा है , जहाँ अब वो हसीन पल नसीब नहीं हैं
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