नदी में नहाना भी याद है
गीले कपड़े पहनकर
रस्ते में सुखना भी याद है
रोना भी याद है रुलाना भी याद है
अपने आप पर बच्चों को हसाना भी याद है
अपनी गलती पर दूसरे को फ़साना भी याद है
अपनी धुन में वो गाना भी याद है
बस भूल गए हैं लोग ,बरना हमें तो
हर लम्हा बिताना भी याद है
दिलीप कुमार
गीले कपड़े पहनकर
रस्ते में सुखना भी याद है
रोना भी याद है रुलाना भी याद है
अपने आप पर बच्चों को हसाना भी याद है
अपनी गलती पर दूसरे को फ़साना भी याद है
अपनी धुन में वो गाना भी याद है
बस भूल गए हैं लोग ,बरना हमें तो
हर लम्हा बिताना भी याद है
दिलीप कुमार
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