मंगलवार, 19 अप्रैल 2016

नदी में नहाना  भी याद है
गीले कपड़े पहनकर
रस्ते में सुखना भी याद है
रोना भी याद है रुलाना भी याद है
अपने आप पर बच्चों को हसाना भी याद है
अपनी गलती पर दूसरे को फ़साना भी याद है
अपनी धुन में  वो गाना भी याद है
बस भूल गए हैं लोग ,बरना हमें तो
हर लम्हा बिताना भी याद है

दिलीप कुमार

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